
इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य
श्रील प्रभुपाद
जगद्गुरु श्रील प्रभुपाद ने संपूर्ण विश्व में कृष्ण-भक्ति की दिव्य गंगा प्रवाहित की और अनगिनत लोगों को आध्यात्मिक जीवन में वापस जाने का व्यावहारिक मार्ग प्रदान किया।
गौरांग प्रेम स्वामी महाराज अपने हृदयस्पर्शी गौर-कथा और श्रीमद्भागवत प्रवचनों के लिए भक्त समुदाय में अत्यंत प्रिय हैं। वे शास्त्रों के गूढ़ सिद्धांतों को भी अत्यंत सरल व हृदयग्राही शैली में प्रस्तुत करते हैं।

"सच्ची श्रद्धा के साथ श्रीहरिनाम का श्रवण और कीर्तन करना ही भक्ति का शुभारंभ है।"
ब्रह्म-माध्व-गौड़ीय संप्रदाय से संबद्ध परम पूज्य महाराज का संपूर्ण जीवन श्रीगुरु, साधु और शास्त्रों के निर्देशों के प्रति पूर्ण समर्पण और सेवा का एक आदर्श उदाहरण है।

इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य
जगद्गुरु श्रील प्रभुपाद ने संपूर्ण विश्व में कृष्ण-भक्ति की दिव्य गंगा प्रवाहित की और अनगिनत लोगों को आध्यात्मिक जीवन में वापस जाने का व्यावहारिक मार्ग प्रदान किया।

दीक्षा गुरु एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शक
परम पूज्य जयपताका स्वामी महाराज के स्नेहमय मार्गदर्शन में महाराज श्री चैतन्य महाप्रभु के संकीर्तन मिशन की सेवा में निरंतर और निष्ठापूर्वक समर्पित हैं।

सेवा-परंपरा के वाहक
महाराज गौर-कथा प्रवचन, नामहट्ट प्रचार मिशन और श्रीहरिनाम की शरण में आने वाले भक्तों की स्नेहमयी देखभाल के माध्यम से इस परम कृपा-धारा को जन-जन तक पहुँचा रहे हैं।
यही गुरु-परंपरा की जीवंत सेवा-धारा है—परंपरा से प्राप्त कृपा को गौर-कथा, नामहट्ट प्रचार और भक्तों की सेवा के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ाना।
महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित होने वाली गौर-कथा भक्तों के हृदय में श्री चैतन्य महाप्रभु की दिव्य लीलाओं को सजीव कर देती है। वे श्रीमद्भागवत और श्री चैतन्य-चरितामृत के सिद्धांतों को अत्यंत भक्ति, स्पष्टता और दैनिक साधना में उपयोगी व्यावहारिक शिक्षाओं के साथ प्रस्तुत करते हैं।
"श्रद्धापूर्वक श्री कृष्ण-कथा का श्रवण करने से कठोर हृदय भी द्रवीभूत और कोमल हो जाता है।"
भगवान की दिव्य लीलाओं को अत्यंत जीवंत, भक्तिमय और हृदयग्राही शैली में श्रवण करें।
श्रीमद्भागवत के गूढ़ दर्शन और सिद्धांतों को अत्यंत सरल भाषा व व्यावहारिक जीवन में उपयोग की सीख के साथ समझें।
नव-जिज्ञासुओं, साधना करने वाले भक्तों और वरिष्ठ वैष्णवों—सभी के भक्ति जीवन को पोषण देने वाली दिव्य कथा।

आगामी प्रवचन, मंदिर के उत्सव और नामहट्ट भक्त सभाएं।
अपने आध्यात्मिक गुरुदेव के आदेश के प्रति दृढ़ निष्ठा रखते हुए, गौरांग प्रेम स्वामी महाराज ने नामहट्ट प्रचार मिशन का विस्तार किया है और असंख्य आत्माओं को श्रीहरिनाम का आश्रय प्राप्त करने में सहायता की है।
"मेरा जीवन केवल मेरे परमाराध्य गुरुदेव के दैवी दृष्टि और जगद्गुरु श्रील प्रभुपाद की महान विरासत की सेवा करने का एक विनम्र प्रयास है।"

द्वार-द्वार जाकर प्रचार करने, भक्तों की स्नेहपूर्वक देखभाल और साधु-संग के माध्यम से हर घर और हर हृदय तक श्रीहरिनाम पहुँचाना।
परम पूज्य महाराज की आध्यात्मिक सेवाओं, प्रचार यात्राओं, कथा और भक्त-संग के कुछ अत्यंत भावपूर्ण क्षण।
परम पूज्य गौरांग प्रेम स्वामी महाराज के दिव्य प्रवचनों से संकलित कुछ उपदेश, जो हमारे कृष्णभावनामृत के मार्ग को सुगम व प्रशस्त बनाते हैं।
"श्रीहरि और श्रीगुरुदेव की अहैतुकी सेवा ही जीव का परम कल्याण है। जीवन के प्रत्येक पग पर उनका निरंतर स्मरण बनाए रखना ही हमारी मुख्य साधना है।"
"कलियुग में श्रीहरिनाम संकीर्तन ही एकमात्र परम औषधि है। इस दिव्य नाम के प्रभाव से हृदय के सभी अनर्थ और मलिनता समूल नष्ट हो जाती है, और शुद्ध भक्ति का उदय होता है।"
"श्री चैतन्य महाप्रभु की परम अनुकम्पा नामहट्ट के माध्यम से घर-घर में श्रीहरिनाम का प्रचार करना है। जहाँ भी भगवान के पवित्र नाम का संकीर्तन होता है, वहाँ साक्षात श्रीधाम मायापुर प्रकट हो जाता है।"
नियमित हरिकथा श्रवण भक्त के हृदय को भगवान श्री कृष्ण और वैष्णवों के चरणों के समीप रखता है।

विशेष प्रवचन